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भगवान राम को एक अप्सरा ने दिया दिया था माता सीता से अलग होने का श्राप जानिए आखिर क्यों ?

भगवान राम और माता सीता को लेकर कई प्राचीन कहानियां है जिसमे सत्य की असत्य पर विजय की गाथा का गुणगान किया गया है ,लेकिन इस सत्य की विजय को जीतना इतना आसान नहीं था | इसके लिए भगवान राम के साथ उनके चारों  भाई और हनुमान जी के साथ में कई महान वीरों ने अपना योगदान दिया था तब जाकर यह विजय प्राप्त की थी | यह घटना महर्षि बाल्मीकि के द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस  में आदि से अन्त तक बताई गयी है |जिसमे भगवान राम के गुणगान की ब्याख्या की गयी है |आज हम आपको इस लेख में यहाँ बताने कि कोशिश करेंगे की आखिर वह ऐसी कौन सी परिस्तिथि थी जिसके कारण  भगवान श्री राम को माता सीता से अलग रहना पड़ा था | इसके लिए हम आपको सुग्रीव ,बालि और  भगवान श्री राम से जुडी एक कथा बताने जा रहे है |

एक समय की बात थी किसकिन्धा पर्वत के राजा बाली थे इनकी पत्नी का नाम तारा था | बाली का एक भाई था जिसका नाम सुग्रीव था जो भगवान राम के भक्त थे | सुग्रीव और बालि के बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी ,यहाँ तक बालि ने सुग्रीव की सम्पत्ति और पत्नी को भी अपने कब्जे में कर लिया था | इसी का बदला सुग्रीव बालि से लेना चाहते थे .इसके लिए सुग्रीव ने भगवान राम की मदद लेने की सोची और अपनी सारी ब्यथा भगवान को बता दी | भगवान राम यह अन्याय नहीं होना देना चाहते थे इसीलिए उनोंहे सुग्रीव को मदद देने का वचन दे दिया |लेकिन यहाँ पर एक दुविधा यह थी की सुग्रीव और बालि दोनों की शक्ल इतनी मिलती जुलती थी की भगवान राम पहचानने में गलती कर जाते थे |


इसके लिए उनोंहे के उपाय निकाला ,भगवान राम ने अपनी फूलो की माला सुग्रीव को पहना दी और कहा अब जाओ |इसके बाद भगवान श्री रामं ने बालि का अंत कर दिया और संपत्ति के साथ में हरण की हुई पत्नी को भी वापस दिला दिया | लेकिन यहाँ पर बालि की पत्नी को यह सब सहन नहीं हुआ तारा जो की एक अप्सरा थी उसने भगवान राम को यह श्राप दिया कि भगवान राम अपनी पत्नी सीता को पाने के बाद में फिर से खो देंगे | और अगले जन्म में उनके पति उनका अंत ऐसे ही करेंगे | इसके बाद भगवान श्री राम जब रावण के कैद से माता सीता को छुड़ाकर लाते है लेकिन माता सीता उन्हें नहीं मिलती है और धरती में समा जाती है | इसके बाद द्वापर युग में भगवान राम श्री कृष्ण के रूप में अवतरित होते है ,और एक दिन जंगल में विश्राम कर रहे रहे होते हैं जिसके बाद एक आखेटक के द्वारा श्री कृष्णा का भी अंत हो जाता है |

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