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पहले पिता के साथ मिलकर बेचा करते थे सब्जी अब जिला जज बनकर करने जा रहे है समाज की सेवा

कहते है कि अगर आपने अपने मन में किसी काम के लक्ष्य को पाने का द्रण संकल्प ले लिया तो वो काम जरुर पूरा होता है और उसके बाद जो ख़ुशी मिलती है वो सभी के साथ मिलकर हम एक दुसरे से बाटते हैं | एक कहावत कही गयी है कि करत -करत अभ्यास के जड़मत होत सुजान रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान | इसका अर्थ यह है की जिस प्रकार कुँए की रस्सी पत्थर पर बार – बार घिसती है तब जाकर उस पत्थर पर अपने निशान छोडती है उसी प्रकार मनुष्य को भी मेहनत करनी चहिये जिससे वह अपनी अच्छाई की छाप दुसरे लोगों पर छोड़ सके |

गरीबी बहुत ही खराब होती है इसमें न मनुष्य खा पाता है न ही सही से कपडे पहन पाता है और न ही अपने लिए रहने के लिए मकान व्ब्ना पाता है | लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होतें है जो इस गरीबी में जीते है और अधिक से अधिक परिश्रम करके अपना नाम उजागर करते हैं |आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे है जिसके पास रहने के लिए सही से घर नहीं था अपना गुजर सब्जी बेचकर करता था लेकिन आखिरी में उसके परिश्रम ने उसकी किस्मत के दरवाजे खोल दिए और आज वह जज बनकर समाज की सेवा करने जा रहे हैं | अभी जल्द ही pcs j का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ है जिसे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से आयोजित किया जाता है इसमें अमित मौर्य ने सफलता प्राप्त की है |

अमित के लिए ये सफलता किसी चुनौती से कम नहीं थी यहाँ तक पहुचने के लिए अमित को बहुत मेहनत और त्याग भरा जीवन जीना पड़ा तब जाकर अमित यहाँ तक पहुचे हैं | इनके पिछले जीवन की बात करे तो अमित अपने पिता के साथ में सब्जी का ठेला लगाते थे यही इनके जीवन निर्वाह का मुख्य साधन था | इनका बड़ा भाई ऑटो पार्ट्स की दुकान थी और छोटा भाई सब्जी की दुकान पर बैठता था | अमित मौर्य ने 8 बार नेट की परीक्षा को पास किया है लेकिन उनका मन एक जज बनकर समाज की सेवा करना था जिसके लिए उनोंहे बफी मेहनत की थी | अमित ने  इस परीक्षा में 457 स्थान हासिल किया और सबको यह सीख दिया कि अगर आपके अन्दर मेहनत और लगन है तो आप कोई भी कठिन से कठिन काम कर सकते है |

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